तू बस यहीं रहना !

निर्मल होने को जो मैंने गंगा में डुबकी लगाई,मेरे बदन में आंसू की धाराएं समाई,समझ ना पाया जो मन तो फिर पानी के अंदर देखा अंतर्मन, वो जो सुन रहा था सिसकियां, जिसे लगी थी गंगा से अपने पन की लगन , मां तू चुप हो जा तेरी दशा को दिशा देंगे, हम मैला न […]

फिर !

यूं लग रहा है मौसमों में रवानी बड़ गई है,लंबी काली रात अब सुबह में बदल गई है,दुआ है कि हवाओं में अब पैगाम सुहाने आयें,इक दूजे से दूरी के अब न नए बहाने आयें, आए अब तो आये जश्न के मौसम जितने आंसू छलके हैं उससे ज़्यादा मुस्कुराहटें बांट पायें हम , ओ रब […]

आसमां हरा ,बाग हैं खाली !

ऐसा ही तो है ऐसा भी तो है, तुम्हे नही लगता मुझे तो कभी कभी लगता है बागों में कुछ नहीं बचा है, बस, एक आसमां हरा भरा है , उसके नीले नीले पन्नों में सपने तैरते हैं, समंदर की ये छत कितनी प्यारी है, किसी ने नहीं ये तो मेरे हृदय ने संवारी है, […]

मुझे नहीं पता !

मुझे नहीं पता लोगों को कहां जाना है,मगर इतना मालूम है की ये जो वर्तमान है मुझे इसका साथ निभाना है , इसके रंगों में जब सुबह होती है तो यह तसल्ली होती है की मेरी निगाह सूर्य की किरणों को देख पा रही है, मेरे गाल हवा को महसूस कर पा रहे हैं, मैं […]

काश ! मौसम निर्मित किये होते

हम खुशनसीब हैं कि रब ने हमें बनाने से पहले मौसम बनाये हैं, वन उपवन बनाये हैं, जंगल जगाये हैं, हम बदनसीब हैं कि सृजन की कड़ी आगे बड़ाने से पहले हमने जंगल जलाये हैं, हमने बिन समझे कंक्रीट के महल सजाये हैं, कौनसे हक से फिर नन्ही जानो को धरा पर लेके आये हैं, […]

शुभ नवरात्रि

अक्तूबर को हमने जाना नही कभी किताबी कोई मौसम होता है,यह तो बहारों का त्योहारों का मौसम होता है, बच्चों ने यही पढ़ा है की जग में बस भारत में ऐसा होता है ❤️❤️ may the kids enjoy the most they deserve the most and as my nephew says आपने दिवाली पर नही आना तो […]

सपने ❤️

सपने अंबर ही तो नही हो सकते बस,सपने धरा भी तो हो सकते हैं, सपने चांदनी ही तो नही हो सकते बस, सपने जुगनू भी तो हो सकते हैं, सपने तुम संग जीवन पर्यन्त साथ न हो तब भी,सपने तुम संग पल भी तो हो सकते हैं, यह लाज़मी तो नही की सपनो से कुछ […]

घर से बांधकर लाई है याद! जीवंत!

घर से लाया है हर बार भर के प्यार दुलार, कुछ मीठा तो कुछ खट्टा मेरे यार, इस बार मगर जो खिड़की से घर की हरियाली देखी, मैंने सोचा कि घर से ले आऊं इस बार हरी बहार, छूकर मिट्टी को मैंने कुछ पौधे भर लिए, पहली बार हुआ होगा जो जीवंत मेरे साथ वो […]

हिंदी ❤️

दिल को जितना भी सुना मैंने , उसने हिंदी में सुनाया, मैंने हिंदी में समझ कर, हिंदी से जुड़कर, हिंदी में खोकर , हिंदी सा लिखा ! दिल की भाषा सूर्योदय की आशा, शामों की गुलाबी आभा , हिंदी मेरे और मुझसे जुड़े एहसासों को दिल पे लिखने की भाषा ❤️

पसंद ,नापसंद !

इस शहर में धूल बहुत है, मगर मुझे तो धुंध पसंद बहुत है, इस शहर में शोर बहुत है, मगर मुझे तो बरसातों में बन ना मोर पसंद है, इस शहर में दौड़ बहुत है, मगर मुझे तो टहलना पसंद बहुत है, इस शहर में सुना है नौकरियां बहुत हैं, मगर मुझे तो मनमर्जियां पसंद […]