गाँव क्या अब शहर हो गये हैं यां फिर खंडहर !!!

अक्सर कितनी ही बातों में बचपन याद आ जाता है,बचपन होता भी तो ऐसा है ,अपनी धुन मे मगन । वो धुन फिर कब सुनाई देती है पता नहीं हाँ इतना पता है की धुन है अंदर ही पर अंदर से वो इतना हल्के हल्के बोलती है की बाहर के शोर में गुम हो जाती … Continue reading गाँव क्या अब शहर हो गये हैं यां फिर खंडहर !!!

डर

जंगल का था रास्ता और कदम बड़े जा रहे थे  , “डर” भी साथ कदमताल करता चला जा रहा था , “ डर ” बाघ का !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! नहीं बिलकुल नहीं , डर मनुष्य का था  , कदम किसके थे ? लाज़मी है कि औरत के थे ।

“चिनाब” दरिया-ए-इश्क़

ओ “चंद्रभागा “देर साँझ तेरे किनारे बैठ,तुझे देखती रही आँखें इस तरह , जैसे कोई रिश्ता नाता हो पुराना उस तरह , इश्क़ बह बह के आ रहा था ,मेरे कानों में वो गीत गा रहा था , तेरे पानी में जवानी दिख रही थी यां कहानी या फिर कुछ जवान कहानियाँ , कहानियाँ जिन्हे … Continue reading “चिनाब” दरिया-ए-इश्क़

किताब

Writing is all about experience of different emotions,the more one get the more one writes,it's beautiful to experience the straight and meandering roads of life and keep the book alive.💕

रंगरेज़ ,क्या सुनोगे मेरी !/being a rainbow

सोच रही हूं , रंगरेज़ के पास हो आऊं, वो सब सफेद को खिले रंगों का जीवन देता है, जाकर कहूंगी मुझे भी रंगों के किसी बर्तन में भिगो दे, समाज की आंखों से बचाकर फिर मुझे स्नेह की धूप में कहीं सुखादे , मैं भी रंगों की उमंग सी हो जाऊंगी, बेरंग रहने की … Continue reading रंगरेज़ ,क्या सुनोगे मेरी !/being a rainbow

Playing with the wind

Struggling with the wind, Or playing with the wind, Choice is ours, Neither the winds going to change, Nor we will stop the survival game, The story will continue in all its glory.

हिमालय तुमने कहा है/poetic Himalaya

Love is the most beautiful feeling in the world,when you fall in love you only indulge in deeper love,love is unconditional ,to really understand the uncondition just look around and see what makes you fall in love .Love is beyond the human barriers ,one can find love anywhere if it connects to the soul. We … Continue reading हिमालय तुमने कहा है/poetic Himalaya

छलावा/illusion

The world seems to be more materialistic in nature, There is a famine of a real creature, Man seems to be of very selfish nature, Fake identities,fake lives,fake smiles I wonder where the truth hides, It's all in illusionary world, May be human sometimes become a piece of moon, Joining pieces ,leading to atleast one … Continue reading छलावा/illusion

खोज इश्क में नाम अपने की/Searching self in love

ढूंढ रहे हैं सब नाम अपना , इश्क की अधूरी और मुकम्मल दास्तानों में, गुम कर रहे हैं हम नाम अपना हिमालय तेरी मोहब्बत के अफसानों में, तू बुत नहीं और ना ही तू इंसान है, शायद इसलिए मेरी मर्ज़ी से ही तू मुझपे मेहरबान है, चाहूं तुझको तो मोतियों सी बर्फ में निहार लूं, … Continue reading खोज इश्क में नाम अपने की/Searching self in love